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Showing posts from October, 2020

ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध (WBC & Dengue)

ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध मनुष्य के खून के अंदर जैसे खलबली मची हो, रक्त के अंदर आपाधापी मची हो, जैसे कोई कोई भूत तांडव कर रहे हो, खून और शरीर में महायुद्ध चल रहा हो; ...

ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध (WBC & Dengue)

ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध मनुष्य के खून के अंदर जैसे खलबली मची हो, रक्त के अंदर आपाधापी मची हो, जैसे कोई कोई भूत तांडव कर रहे हो, खून और शरीर में महायुद्ध चल रहा हो; ...

इन्दिरा छन्द (साहिल)

    🍁इन्दिरा छंद 🍁 विधान - [नगण रगण रगण+ लघु गुरु] 111 212  212  12, प्रति चरण ग्यारह वर्ण, [चार चरण, दो दो चरण समतुकांत] सरल भक्ति से साधना करूँ| वचन कर्म  से याचना करूँ|| नमन  अर्चना नित्य कीज...

मुक्तक

1222 ×4 नजर  जिसपे  ठहर  जाए, वही तो  नूर  होता  है , सजा  तो  बाद  मिलती है, जब  वो  दूर  होता  है, मुहब्ब़त खेल नयनों का समझ में  क्यूँ नही आता, नयन  रसपान  कर - करके नशा  भरपूर  होता ह...

गीत मुक्तक वीडियो कवि साहिल जी द्वारा

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1538536322999612&id=526479070737080&sfnsn=wiwspmo

बाल कविता ~ लाल मुगेरी के केले

🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌🍌        लाल मुगेरी के केले लाल मुगेरी आया  देखो| पीले  केले  लाया  देखो| टुंगू  -  मूंगू   दौड़े  आये| मल्लू और मकल्लू आये| मीठे –  मीठे   प्यारे   केल...

शुभमाल छन्द

🏆 शुभमाल छंद 🏆 शिल्प:- जगण जगण (121 121), दो-दो चरण तुकांत, [6 वर्ण प्रति चरण] तजो सब दोष| न हो मन रोष|| रखो  सहकार| मिले सुखहार|| करो  सब  प्रेम| रखो उर  क्षेम|| बने  जन  प्रीत| यही  जग  रीत|| बजे   ...

श्येनिका छन्द

     🍁🍃 श्येनिका छंद  🍃🍁 विधान ~ रगण जगण रगण लघु गुरु 11 वर्ण  ( 212  121  212  1   2 ) (दो - दो चरण समतुकांत ) बुद्धि से विवेक ही  खँगालिए| दर्द  में  विषाद  में सँभालिए|| काम क्रोध लोभ को मिटाइए| ...

सायली विधा (1,2,3,2,1)

सायली विधा (तुम मेरी हो )         तुम      मेरी हो मेरी ही रहोगी     है  यही      तमन्ना|          वादे   निभाऊंगा जरूर     तुम साथ देना        यही  है          प्रीत|         मेरा  ...

हिन्दी गीत

✴️ हिन्दी गीत ✴️ मधुर - मधुर हिन्दी भाषा, हम सबको दुलराती है| उर स्तल अहसास जगाकर जीवन सुगम बनाती है| स्नेह प्रेम सद्भाव अचल, हिन्दी हमें सिखाती है| मन मन्दिर में प्रीत सुखद भ...

त्रिपदिक जनक छन्द

     त्रिपदिक जनक छंद संस्कृत के प्राचीन त्रिपदिक छंदों (गायत्री, ककुप आदि) की तरह जनक छंद में भी ३ पद (पंक्तियाँ) होती हैं. दोहा के विषम (प्रथम, तृतीय) पद की तीन आवृत्तियों से जन...

मेरा ख्व़ाब

🎊🌹  मेरा ख्व़ाब  🌹🎊       (गीत~ 16×14) मेरे ख्वाबों की दुनिया में, जब- जब  तुम सहलाती  हो| मीठा सा अहसास जगाकर, सदा  छोड़ ही जाती हो| बस ख्वाबों की दुनिया में तुम, एक शरारत कर देना| एक  ...

शुभमाल छन्द

  🏆 शुभमाल छंद 🏆 शिल्प:- जगण जगण (121 121), दो-दो चरण तुकांत, [6 वर्ण प्रति चरण] तजो सब दोष| न हो मन रोष|| रखो  सहकार| मिले सुखहार|| करो  सब  प्रेम| रखो उर  क्षेम|| बने  जन  प्रीत| यही  जग  रीत|| बजे ...

जय श्री राम (डॉ• राहुल शुक्ल साहिल)

एक ही नारा एक ही नाम जय श्री राम जय श्री  राम| निशिदिन जप लो तुम अविराम जय श्री  राम जय श्री  राम| जीवन  देते सबके  राम भव बंधन से मुक्त कराते जय श्रीराम जय श्रीराम| मर्यादित  ...