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Showing posts from January, 2023

बहुत देर कर दी आपने

बहुत देर कर दी आपने दिल की बात कहने में मगर मन में आ ही गया तो आज कहता हूं अपने दिल की बात मेरे मन की बातों को कैसे तुम समझ लेती हो जो मैं सोचता हूं वो कैसे तुम जान लेती हो मेरे हृदय के भावों को कैसे शब्दों का रूप देती हो तुम मेरे विचारों की हलचल को कैसे दिशा देती हो तुम मेरी मनचली, मतवाली यादों को प्रतिरूप देती हो तुम मेरा अहसास हो तुम मेरे साहित्य की प्यास हो तुम  मेरी मोहब्बत, मेरा जज़्बात हो तुम मेरा प्रेम, मेरी शुरुआत हो तुम मेरे शब्द, मेरा साज हो तुम मेरा गीत, मेरा संगीत हो तुम  मेरी पहचान, मेरा सम्मान हो तुम तुम्हारा साथ ही मुझे जिंदगी देता है तुमसे प्यार ही संजीदगी देता है आज सभी कलमकारों के समक्ष तुमसे प्रेम का इजहार करता हूं तुमसे बेपनाह प्यार का इकरार करता हूं मानना होगा तुम्हें  मेरे प्यार को स्वीकार तो करना ही होगा इस जन्म नहीं सात जन्मों तक मैं तुम्हारा रहूंगा  सिर्फ तुम्हारा अब तक अनकही मोहब्बत के बारे में सोचना जरुर  मैं इंतजार करूंगा मैं इंतजार करूंगा| ••♪•••••♪ •♪••••••♪ तुम मेरी हो तुम मेरी हो तुम मेरी कलम हो और मैं एक कलमकार हूं | ©️ डॉ• राहु...

राष्ट्र प्रेम

राष्ट्र प्रेम  नींद की इस खुमारी से जागो, आओ मिलकर सृजन गीत गाएँ | कर्म कौशल का दीपक जलाकर, मन की बगिया में फूल खिलाएं | छोड़ दें सारी हम खामियों को, सद्गुणों का मधुर गीत गाएँ | ज्ञान प्रतिभा का उपयोग करके, देश सेवा का प्रण हम उठाएं| पुण्य धरती है ऊंचा हिमालय, शौर्य साहस सरलता सिखाए| देश भारत लगे सबसे प्यारा, आओ मिलकर सृजन गीत गाएँ| शौर्य गाथा शहीदों की पूजित, राष्ट्र भारत की महिमा सुनाएं|  ©️ डॉ• राहुल शुक्ल "साहिल"  प्रयागराज उ•प्र•

मानव अधिकार

   मानव अधिकार आज हनन होता है देखो, मानव के अधिकार का, शत्रु बना बैठा है इंसा, अपने ही परिवार का| राजनीति और कुटनीति से, मरा पड़ा जन आम रे, नहीं डर रहा अत्याचारी, करें गलत सब काम रे| मानवता की भेंट चढ़ गया, कलियुग का संताप रे, वसुन्धरा भी आज दुखी है, बहुत बढ़ा है पाप रे| आज किसानों की हालत से, मुश्किल में है देश रे, जिसको देखो लगा मुखौटा, बदल रहे हैं वेश रे| स्वतंत्र और समानता का, सबको ही अधिकार है, धर्म संस्कृति संविधान ही, जीवन का आधार है|    ©️ डॉ राहुल शुक्ल साहिल

समय

          समय खोकर सब  मिल जाता है, समय  पुनः  नही आता है, समय  हमें  सिखलाता  है, समय  भूल  भी  जाता  है|  समय समय  दिखलाता है, कभी  फिसल भी जाता है, समय   प्रेम   करवाता  है, समय  छोड़ भी  जाता  है| समय सुअवसर आशा है, समय  सुनहरी  भाषा  है, समय कर्म अभिलाषा है, समय  धर्म  परिभाषा है| अंधकार   छँट  जाता   है, अरुण समय पर आता है, बुरा  वक्त  कट  जाता  है, सुखद  समय को लाता है| समय-समय का नाता है, वक्त – वक्त को भाता है, रिश्ता  सुख का  छाता है, मनुज  समय को गाता है| समय  लगन लगवाता है, सुख साधन दिलवाता है, निष्ठा की बगिया पाता है, समय  लक्ष्य दिलवाता है, ©  डाॅ• राहुल शुक्ल साहिल

जिन्दगी

जिन्दगी  खता करती है  जुदा करती है  मिलाती भी है| जिन्दगी  तन्हा करती है  दुखी करती है हँसाती भी  है| जिन्दगी  दूर करती है मेल करती है दुलराती भी  है| जिन्दगी  इक सजा  है  मजा  है आनन्द भी है| जिन्दगी महक है चमक है किनारा भी है  जिन्दगी जहाँ  है फ़िजा है नजारा भी  है| जिन्दगी छुअन है चुभन  है  सहारा  भी  है| जिन्दगी देती है लेती  है सुलाती भी है| जिन्दगी जाती है  आती है  दुलराती  भी  है| जिन्दगी भाती है रूलाती है सुहाती भी  है| © डॉ० राहुल शुक्ल साहिल