मानव अधिकार

   मानव अधिकार

आज हनन होता है देखो, मानव के अधिकार का,
शत्रु बना बैठा है इंसा, अपने ही परिवार का|

राजनीति और कुटनीति से, मरा पड़ा जन आम रे,
नहीं डर रहा अत्याचारी, करें गलत सब काम रे|

मानवता की भेंट चढ़ गया, कलियुग का संताप रे,
वसुन्धरा भी आज दुखी है, बहुत बढ़ा है पाप रे|

आज किसानों की हालत से, मुश्किल में है देश रे,
जिसको देखो लगा मुखौटा, बदल रहे हैं वेश रे|

स्वतंत्र और समानता का, सबको ही अधिकार है,
धर्म संस्कृति संविधान ही, जीवन का आधार है|

   ©️ डॉ राहुल शुक्ल साहिल

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