सायली विधा (1,2,3,2,1)
सायली विधा (तुम मेरी हो)
तुम
मेरी हो
मेरी ही रहोगी
है यही
तमन्ना|
वादे
निभाऊंगा जरूर
तुम साथ देना
यही है
प्रीत|
मेरा
तन -मन
तुझे ही चाहे
तू है
चाहत|
साथी
सुख - दुख
में बनूंगा तेरा
यही है
आरजू |
जीना
तेरे संग
खुशनुमा सा लगे
तू है
दिलरुबा|
मोहक
तेरा चेहरा
आंखे है प्यारी
खो जाऊँ
इनमें|
अहसास
साँसों का
प्राण भर दे
लुभाता है
मुझे|
©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल
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