मुक्तक
1222 ×4
नजर जिसपे ठहर जाए, वही तो नूर होता है ,
सजा तो बाद मिलती है, जब वो दूर होता है,
मुहब्ब़त खेल नयनों का समझ में क्यूँ नही आता,
नयन रसपान कर - करके नशा भरपूर होता है|
©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल
A file has been shared using Link Sharing.
https://s.amsu.ng/GwSEW9Ws6RJN
Valid until: 31-Oct-2020
Comments
Post a Comment