ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध (WBC & Dengue)

ड्ब्लूबीसी और डेंगू वाइरस का महायुद्ध

मनुष्य के खून के अंदर जैसे खलबली मची हो, रक्त के अंदर आपाधापी मची हो, जैसे कोई कोई भूत तांडव कर रहे हो, खून और शरीर में महायुद्ध चल रहा हो; ऐसी गर्मी मची हो, जैसे शरीर नशे में हो, अशक्त बेजान सा पड़ा हो,  इंसान कुछ समझ नही पाता की अंदर क्या चल रहा है, खून बुलबुला रहा है, खून का तापमान और वेग अत्यधिक बढ़ा हुआ लग रहा है, शरीर तपता है, टूटता है, जैसे कोई पत्थरों से कूट रहा हो, जैसे कोई बाहरी योद्धा, कोई बाहरी दुश्मन हमारे देश में घुस आया है | 

खून (रक्त) के मुख्य तत्वों में लाल रक्त कण, सफेद रक्त कण, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा यानी कि उसका जीव द्रव्य होता है | मुख्य रूप से ये खून के मुख्य तत्व हैं जिसमें की आयरन यानी की हीम (Haem) और प्रोटीन यानी कि ग्लोबिन (हीमोग्लोबिन) भी रक्त में आक्सीजन पहुंचाने के लिए मुख्य होता है| शरीर में किसी भी प्रकार का तापमान हो जाने पर बाहरी तत्वों के आक्रमण से रक्त के श्वेत रक्त कण(WBC), जो कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा करते हैं, एक महान योद्धा के समान लड़ाई करते हैं, बाहरी योद्धा कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो हमारे खून का प्रतिरक्षा तंत्र उसको पहचान कर उसके अनुसार औजार बनाकर उस पर हमला करता है, ऐसा हमने विज्ञान की भाषा में भी जाना है|

         कुछ समय पहले मेरे शरीर में भी ऐसी ही एक घटना का आगमन हुआ जिसका मैं अक्षरशः लेखन कर रहा हूँ
डेंगू नाम का कोई बाहरी तत्व (वाइरस) बाहरी दुश्मन जिस को विज्ञान की भाषा में फॉरेन बॉडीज कहा जाता है, ना जाने कैसे मच्छर के माध्यम से मेरे खून में घुस आया और जैसे ही उसने घुसने की कोशिश की डब्लू बी सी (श्वेत रक्त कणों) ने उससे लड़ाई चालू कर दी और उसने अपनी आदत अनुसार रक्त के ग्लोबिन भाग और प्लेटलेट्स को खाकर अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर दिया और इतनी तेजी से संख्या को बढ़ाने लगा कि डब्ल्यूबीसी उसको मारने में पीछे हो जा रहा था लेकिन डेंगू का वाइरस तो यही सोच रहा है कि मेरी मौत असंभव है और मैं इसी तरह से बढ़ता जाऊंगा और प्लेटलेट को खा- खा कर अपना समूह बढ़ाता रहूंगा और इस इंसान की हालत खराब कर दूंगा लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र बहुत मजबूत है जैसे ही ब्रेन को पता लगता है किस बीमारी या परेशानी से कोई अंग ग्रस्त है, तो ब्रेन समुचित कदम उठाकर खानपान में परिवर्तन कर लेता है| मैंने जैसे ही बुखार को कम करने के लिए औषधियाँ  एवं अपने खानपान में प्लेटलेट बढ़ाने वाली चीजें जैसे ही लेना शुरू की तो जैसे श्वेत रक्त कणों को और बहुत सारे औजार और सेनाएं मिल गई और उन्होंने फिर से डेंगू के वाइरस पर हमला कर दिया| खून के अलग-अलग भागों में जाकर हर जगह उस पर हमला कर-करके उसको खत्म करने की कोशिश जारी रखी और दो-तीन दिन में ही उसको धीरे-धीरे जड़ से खत्म कर दिया और प्लेटलेट को पुनः धीरे-धीरे अपनी संख्या प्राप्त करने के लिए समय मिलने लग गया और श्वेत रक्त कण लाल रक्त कण एवं मानव का खून विजयी हुआ और उसने कहा डेंगू के बैक्टीरिया दोबारा कभी भी यह मत समझना के बाहर से आकर तुम हमेशा किसी के शरीर पर हमला बोलकर विजय पा ही लोगे विजय पाना असंभव है|

  जय प्रतिरक्षा जय हिन्द
      !! धन्यवाद !!

©️डॉ• राहुल शुक्ल साहिल

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