मन की आँधी

मन में भी आँधी और तूफान होता है
भाव भी आँधी और तूफान लाते हैं
बदल देते है जिन्दगी के मायने को
बिखर जाता है सपनों का महल
टूट जाते हैं गुरबत के आशियाने
कुछ बोल नही पाती उम्मीदों की आवाज
अपेक्षाओं की ईंट को जंग लग जाती है
जब एक औरत के सपनों का राजकुमार
नशे में धुत शारिरीक प्रताड़ना देता है
हो जाता उसका अभिमान चूर -चूर
चारो तरफ बस आँधियां ही आँधियां
जिन्दगी में बस तूफान नज़र आता है
दिन में रातों का अन्धकार नजर आता है
क्या है इसका सफर समझ नही आता है
सारी कायनात भी विपरीत नज़र आती है
भाग्य के पत्थरों का पहाड़ नजर आता है
सामने दिखती है मुश्किलों की दुनिया
भटकती हुए विचार पीछा नही छोड़ते
नयी कोई खुशियाँ आना ही नही चाहती
कब तक इन आँधियो से औरत का सामना होगा
जगत पिता के संसार में शक्ति कब नजर आएगी
कब इस असुर सत्तात्मक समाज का अंत होगा
बीच क्या है विकृति, व्यसन या कुछ और
इस पे भी सबका विचार आना चाहिए
आँधियों का जड़ से प्रतिकार होना चाहिए  
नर-नारी का समान अधिकार होना चाहिए
प्रेम में स्नेह का सहयोग जरूरी है
श्रृद्धा और विश्वास से नींव बनानी चाहिए
शोषण की आँधियों का प्रतिकार जरुरी है
सशक्त बनाकर खुद को जड़े मजबूत करनी होगी
तभी इन झंझावतों की आँधियां थमेगी
और जिन्दगी में फूलों की बरसात होगी|

    धन्यवाद

©️ डॉ० राहुल शुक्ल साहिल

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