नील छन्द (दर्शन)

     🍁नील छंद 🍁

विधान~[(भगण×5)+गुरु ]
211 211 211 211 211 2
16 वर्ण, 4 चरण
दो-दो चरण समतुकांत।

हे मनभावन स्नेह सुहावन प्रीत लिखूँ |
मोहक सूरत दर्शन सुन्दर गीत लिखूँ ||
जीवन  चाहत  प्रेम  सुहावन रीत बने|
पावन नूतन  शब्द सुभावन  गीत बने||

दिव्य उपासक साधक तामस दोष तजूँ|
हे जगपालक दुःख निवारक नित्य भजूँ||
मानस  मोहक  सूरत दर्शन  नित्य करूँ|
हे   रघुनंदन  पूजन  वंदन  नित्य  करूँ||

©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल

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