समय (साहिल)
*समय*
खोकर सब मिल जाता है,
समय पुनः नही आता है,
समय हमें सिखलाता है,
समय भूल भी जाता है|
समय समय दिखलाता है,
कभी फिसल भी जाता है,
समय प्रेम करवाता है,
समय छोड़ भी जाता है|
समय सुअवसर आशा है,
समय सुनहरी भाषा है,
समय कर्म अभिलाषा है,
समय धर्म परिभाषा है|
अंधकार छँट जाता है,
अरुण समय पर आता है,
बुरा वक्त कट जाता है,
सुखद समय को लाता है|
समय-समय का नाता है,
वक्त – वक्त को भाता है,
रिश्ता सुख का छाता है,
मनुज समय को गाता है|
समय लगन लगवाता है,
सुख साधन दिलवाता है,
निष्ठा की बगिया पाता है,
समय लक्ष्य दिलवाता है,
© डाॅ• राहुल शुक्ल साहिल
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