"शून्य -एक आरम्भ" ई पुस्तिका की भूमिका
शून्य से जिन्दगी का आरम्भ है! और शून्य में ही विलीन नाशवान ये शरीर है; इनके बीच का कर्म और संघर्ष ही मनुष्य की जिन्दगी है|
जीवन में हजारों कष्टों और व्याधियों से जूझते हुए मनुष्य बस जिए जा रहा है| किसी कार्य की पूर्णता और सफलता उसकी लगनशीलता, श्रमशीलता, आस्था और दृढ़ विश्वास पर निर्भर करती है|
शून्य से हमारे लेखन की शुरुआत हो सकती है, शून्य से किसी अभियान की शुरुआत हो सकती है, शून्य से शिखर तक पहचान बन सकती है| शून्य ही ब्रह्मांड है, शून्य ही ब्रह्म है, शून्य ही व्योम है, शून्य ही ओम है|
सम्पूर्ण ऊर्जा और ओज के साथ किसी भी कार्य का संकल्प हमें शून्य से सैकड़ों और लाखों हाथों के सहयोग तक पहुँचाएगा, ऐसी आशा सदैव बनाए रखना ही एक मनुष्य का कर्तव्य है| दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन, परिश्रम, विश्वास और ईश्वर आस्था से संसार का कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है|
"शून्य~एक प्रारम्भ" पुस्तक से जो अलख हमारे प्रिय भाई पं• सुमित शर्मा 'पीयूष' जी जलाना चाहते हैं उसमें हम सभी का पूर्ण सहयोग सदैव रहेगा, समाज में व्याप्त कैन्सर जैसी भयावह बीमारियों के बचाव रोकथाम और उनके जुड़े मिथकों को मन से दूर भगाकर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के कार्य का आरम्भ भी कलमकारों को ही करना होगा| जनहितकारी एवं जागरूकता संबंधी किसी भी प्रकार के लेखन में हमें सदैव विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के संस्थापक एवं सचिव श्री दिलीप कुमार पाठक सरस जी एवं उत्तराखंड ईकाई के अध्यक्ष ओमप्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल" जी का सहयोग सदैव प्राप्त होता है| भाई ओमप्रकाश फुलारा 'प्रफुल्ल' जी पुस्तक को अलंकृत करने का कार्य में सदैव ही तत्पर रहते हैं | हमारी परम आदरणीया सुशीला धस्माना मुस्कान दीदी का मानसिक संबल भी हमें ऊर्जा प्रदान करता है| हम सब के छन्द गुरु शैलेन्द्र खरे 'सोम' जी एवं बड़े भाई समान कौशल कुमार पाण्डेय 'आस' जी का मार्गदर्शन पथ प्रशस्त करता है| अनुज नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत' की ओजस्वी ऊर्जा हमारी संस्था एवं साहित्य साधना को उच्च सोपान पर ले जाने को अग्रसर होगी|
! धन्यवाद !
©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल
रा• उपाध्यक्ष(विश्व ज•ट्र• भारत)
9264988860
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