अनवसिता छन्द (साहिल)

🍁  अनवसिता छंद  🍁
विधान : 111 122   211 22
11 वर्ण, 6/5 वर्णों पर यति,
दो-दो चरण समतुकांत
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      राधा~
प्रियवर  मेरे,  मोहन   प्यारे|
मधुवन  नाचे,  नंदन   सारे||
सुरमय  बंशी, बाजत  सोहे|
तन- मन मोहे, माधव मोहे||

    ग्वाले~
सब जन आओ,दर्शन पाओ|
मिलकर  राधे, नागर  गाओ||
भुवन  बिहारी,  सुंदर   राधा|
जप भयहारी, भागत  बाधा||

    कन्हैया~
भगत  सखा हैं, जीवन  मेरे|
हृदय  बसे   हैं,  नैनन   तेरे||
तन- मन  झूमे, नाचत राधा|
बिन उसके है, जीवन आधा||

     गोपियां ~
बहुत   हुई   है, माखन  चोरी|
बचपन  खेली, संग  जु  होरी||
विरह जलाए, तू अब  आ जा|
सहज हिया में,आकर छा जा||

©️ डॉ० राहुल शुक्ल साहिल

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