त्रिभंगी छन्द (सममात्रिक)

    🍁 त्रिभंगी छंद [सम मात्रिक] 🍁

विधान~ [32 मात्रा,10,8,8,6 यति,
            चरणान्त में गुरु,कुल चार चरण,
             क्रमागत दो - दो  चरण तुकांत,
             पहली 2 या 3 यति पर तुकांत]

हे रघुपति नंदन, मूल  निकंदन, नित  नित  वंदन, करे सभी|
बोलो करूणानिधि, पाऊँ किस विधि, अष्ट सिद्ध निधि, मिले तभी||
हे भव दुखहारी,भज सुखकारी, शरण  तिहारी, मैं  आऊँ|
मन में हिय में बस, हो जीवन रस, ऐसा  जग  यश, गुन  पाऊँ||
 
©️ डॉ० राहुल शुक्ल साहिल

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