गर्मी (साहिल)

🔆🔆  गर्मी    🔆🔆

गर्मी   बढ़ाओ   नही,
रवि  तड़पाओ  नही|
इक तो  ये  विरहा है,
हिया झुलसाओ नही|

नित  तेरी यादों  से,
जीना बेहाल  हुआ|
सूरज  की गर्मी  से,
तन मेरा लाल हुआ|

रात सजन मिलने का,
सपना   दिखाते  रहे|
भानू    सवेरे   नित्य,
गर्मी    बढ़ाते    रहे|

होती  नही  रात  तो,
विरहा  सताते  नही|
निशा  प्रीत आती तो,
सजन भी जाते नही|

©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल

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