तारा (पदपादाकुलक छंद)

         🌺💐  पदपादाकुलक छंद  💐🌺

शिल्प : यह एक 16 मात्रा प्रति चरण वाला चार चरणों का सम प्रवाही मात्रिक छंद है। इसकी मात्रा बाँट है ~ 2 + 4 + 4 + 4 + 2.  अर्थात इस छंद के आरम्भ और अंत में द्विकल अनिवार्य है, और बीच में तीन चौकल या 1 चौकल + एक अठकल होना चाहिये| 4, 5 मात्राओं पर जगण निषेध है| चौपाई और पदपादाकुलक में यही अंतर है कि सभी पदपादाकुलक चौपाई में गिने जा सकते हैं किंतु सभी चौपाई पदपादाकुलक में नहीं गिनी जा सकती, क्योंकि चौपाई को त्रिकल से भी आरम्भ किया जा सकता है|

मापनी 2 + 4 + 4 + 4 + 2 मात्राएँ

      🏆पदपादाकुलक छंद🏆

मापनी ~2 + 4 + 4 + 4 + 2 मात्राएँ

भँवरे  सा  मैं  हूँ  भटक   रहा|
प्रियवर वियोग यूँ खटक रहा||
सुर  में  गाने  का  गुन  दे  दो|
हिय  के  रागों  को  धुन दे दो||

मधुरिम प्रीतों का गान लिखूँ |
सुंदर  शृंगारिक  मान लिखूँ ||
प्रतिभा  निखरे जीवन महके|
खगकुल सा अन्तर्मन चहके||

दिन बहुत भये अब तो आओ|
तड़पत मन में जल बरसाओ||
सुखमय  हो  भावों  की  धारा|
प्रियतम  बन तू  आ जा तारा||

©️ डॉ० राहुल शुक्ल साहिल

    पदपादाकुलक छन्द

प्रभु रघुवर का है नाम बड़ा|
भारत  भर  में ये धाम बड़ा||
इनकी  गाथा जन-जन गाते|
भव  सागर  से   तरते जाते||

    ©मुकेश शर्मा "ओम"

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