लॉकडाउन और मैं (डॉ० राहुल शुक्ला साहिल)
लॉकडाउन और मैं
(रेखाचित्र)
ऐसा लग रहा है जैसे प्रकृति यह चाहती थी कि कुछ दिन मुझे शांति मिले प्रकृति जो चाहती थी वो हो गया आज सड़कों पर इतना सन्नाटा है, सड़कों पर सिर्फ जानवर और किनारे के पेड़ -पौधे ही नजर आ रहे हैं, जैसे चारों तरफ पेड़ मुस्कुराकर कह रहे हैं कि हे प्रकृति माँ! अब तुझको कुछ दिन का आराम मिलेगा इस प्रदूषण फैलाने वाली इंसानों की मशीनरी दुनिया से|
कुछ गहराई से देखने पर लग रहा था कि जानवरों के भी आँखों में शान्त परन्तु कुछ बदले के भाव नजर आ रहे हैं| आस्ट्रेलिया की जंगली आग में जब 50 करोड़ जानवर जल रहे थे; तब ये सारे इंसान और देश कहाँ थे किसी ने मदद नही की, कुछ एक देशों ने मदद की परन्तु आग तो बुझ ही नही रही थी, सारे जानवर झुलस- झुलस कर तड़प - तड़प कर मर गए, कुछ फॉयरफाइटर्स और वालिन्टियर भी मर गए | प्रकृति तो अपने हिसाब से संतुलन कर ही लेती है|
गौ माता जैसे कई वर्षों से प्रार्थना कर रही थी कि इन इंसानों के पास मुझे कुछ खिलाने का समय नही है, मैं कचरे और गन्दगी में से जूठन खाने को मजबूर हूँ, प्रकृति माता इन इंसानो को कमरे में ही बन्द कर दें, शायद सुन लिया प्रकृति माँ ने |
क्या कोरोना वाइरस अंत है ?
या ऐसे ही कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का संकेत!
ये तो प्रकृति के संसाधनों के दोहन के परिणामस्वरूप प्रकृति के संतुलन की शुरुआत है |
🎍क्या हमें बीमारी आने पर ही सेहत का ख्याल रखना चाहिए ?
🎍 क्या हम विश्व स्तर के कोरोना संकट को देखकर ही शरीर के प्रतिरक्षण (IMMUNITY) तंत्र के बारे में सोचना शुरु किए हैं ?
अभी भी समय है इंसान को प्रकृति से जुड़कर अपना भोजन भी प्राकृतिक करना होगा | शरीर के प्रतिरक्षण तंत्र को मजबूत बनाना होगा ताकि हमारी शरीर संसार की किसी भी विकट बीमारी से लड़ सकें |
बीमारी हो जाने पर बीमारी, दवाइयों और अस्पतालों के चक्कर काटने से अच्छा, पहले से ही स्वास्थ्य नियमों के प्रति जागरुकता अपनाकर सेहतमंद रहें या बीमारियों से दूर रहें|
कोरोना वाइरस या अन्य कोई भी वाइरस को शरीर से भगाने का तरीका भी सिर्फ प्रकृति और प्राकृतिक औषधियों में है|
बस यही गुजारिश हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के सभी जीवधारी हम सबसे करना चाहते हैं कि आप हमारा उपयोग - प्रयोग करें परन्तु दुरुपयोग न करें | इंसान होने के नाते आपकी जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है एवं सबसे आवश्यक भी |
क्रमश:•••••••••••••
! धन्यवाद !
©️ डॉ० राहुल शुक्ल साहिल
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