नैतिक ज्ञान (साहिल)
दिव्य ओज मुख रूप है,
जीवन है सुख धाम,
समय सुनहरी धूप है,
निशिदिन जप लो राम||
सुन्दर सूरत सरल मन,
सदा कर्मरत होवे तन,
गुरु आज्ञा को मानकर,
कीर्ति बनेगी जीवन धन|
सेवा –भाव के सद्गुण से,
जीत लिया जिसने दिल को,
तन - मन सुन्दर जीवन हो,
जान लिया जिसनेे प्रभु को|
गुरु की गरिमा का सदा,
हो,जिसके हिय में मान,
अल्प ज्ञान से भी मिले,
नित्य सहज सम्मान |
© साहिल
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