तू है नारी
जन्म पालना प्रेम सिखाना,
नारी से है सुदृढ़ जमाना|
पुरुषार्थ की सुन्दर जननी,
सकल सुमंगल कथनी करनी|
मन - मन्दिर में स्नेह जगाती,
विविध रूप में है दुलराती|
भाग्य जगाए
पुण्य बनाए
जन्म दात्री
स्नेह सिखाए
सकल करम में
सबसे आगे
फिर क्यूँ मानुष
बेटा माँगे
बेटी की है
सुन्दर करनी
तभी तो बेटी
बनती जननी |
जननी तू
करनी तू
शक्ति तू
मृगनयनी तू
स्नेहमयी
ममता सुखकारी
सुन्दर कृति तू है नारी|
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