देवहरण घनाक्षरी (साहिल)
[ देवहरण घनाक्षरी ]
विधान : 8 8 8 9, चरणान्त तीन लघु ।
अन्तर्मन से काम हो,
हिय में प्रभु नाम हो,
सुहानी हर शाम हो,
ऐसा हर चाहे युवक|
कौशल विकास मान,
बाढ़ै नित बुद्धि ज्ञान,
शिक्षा धन दीर्घ दान,
प्रसून सी फैले महक|
मंजिल आसान बने,
शक्ति पहचान बने,
यश कीर्ति गान बने,
गूंजे चँहु ऐसी धमक |
सेवा–सहकार रहे,
गुरु का आशीष रहे,
कष्ट दुःख सब सहे,
रविवर सी हो चमक|
© डॉ० राहुल शुक्ल साहिल
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