पानी पर दोहे

पानी से जीवंत  है, सकल  जीव संसार|
बाबा जी के बोल है, उचित सार्थक सार|
     
पानी  के  सब  रूप है, बारिश ओस  पसेव|
ताप पड़े तो भाप है, जय- जय हो जल देव||

हरियाली पोखर नदी, जल जीवन  का अर्थ,
पानी  की  महिमा गजब, करो नहि  यूँ व्यर्थ;
चलो सब मिलकर गाएँ, नीर को नही बहाएँ||

नष्ट करो  ना  नीर  को, यही  हमारे  भाव|
पानी के जो  स्रोत है, उनका करो  बचाव||
 
    © डॉ० राहुल शुक्ल साहिल

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