दुआ के फूल
दिल की लगी का सुरूर हो गया,
प्यार में आशिक मजबूर हो गया,
कसूर तेरा नही कम्बख्त उम्र का है,
हर नज़र में नूर ही नूर हो गया|
©️ साहिल
दुआ के फूलों का भंडार समर्पित हो,
मन के भावों का उद्गार समर्पित हो,
कामना आपकी सुख प्रीत से पूर्ण हो,
विश्वास संग प्रेम का संसार समर्पित हो|
©️ साहिल
तेरी सूरत का मुझसा दिवाना तो हो,
आशिक दिलनशीं का परवाना तो हो,
मर के फिर भी मुहब्ब़त जिलायेगें हम,
मर के जीने का मुक्कमल आशियाना तो हो|
©️ साहिल
वफा के बदले तो वफा ही मिलती है,
बस मुहब्बत में शिद्दत होनी चाहिए|
वफा का इजहार ए बयाँ खूबसूरत हो,
बिन बादल भी कभी-कभी बरसात होती है|
©️ साहिल
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