मुक्तक (सुनहरी गाँठ)

      मुक्तक

जरूरतमंद   की  सेवा  धरम का  पाठ  होती  है,

करम करना सुखी रहना यही तो  ठाठ  होती  है,

मनुज बनकर मनुजता का यही मैं पाठ सीखा हूँ,

धरा  पर  प्रेम  ही सुन्दर सुनहरी   गाँठ  होती  है|

© डॉ० राहुल शुक्ल साहिल






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