दादुर गीत ।(डॉ० भगवत स्वरूप 'शुभम')
🐸🐸 दादुर 🐸🐸
[चौपाई]
👁🗨👁🗨👁🗨👁🗨👁🗨👁🗨👁🗨
सावन मास चली पुरवाई।
झर झर करती वर्षा आई।।
भरे जलाशय ताल तलैया।
बालक नाचें ता ता थैया।।
टर्र - टर्र करते हैं दादुर।
हैं प्रतियोगी बने बहादुर।।
बुला रहा दादुरी तिया को।
त्याग रात की सुख निंदिया को।
शरमाती दादुरी कुमारी।
आख़िर वह भी तो है नारी।।
'जोर -जोर से क्यों चिल्लाते!
इतनी जल्दी तुम अकुलाते??
'आती हूँ प्रिय दादुर मेरे।
कौन सहारा है बिन तेरे!!
'लो मैं आई चुप हो जाओ।
सोने दो भी तुम सो जाओ।।
'लोग कहेंगे क्या -क्या हमसे।
ख़लल नींद में करते कब से?
'टर्र-टर्र क्या लगा रखी है!
क्या दादुर ने भाँग चखी है ?'
'छू तो लिया ': दादुरी बोली।
धीरे - धीरे हुई ठठोली।।
'अब तुम टर्र-टर्र मत करना।'
'नहीं दादुरी मत तुम डरना।।'
'एक साल में आती वर्षा।
बरसे बादल दादुर हरसा।।
'अपना हम परिवार बढ़ाते।
हम क्या सितम किसी पर ढाते?
'टर्र- टर्र कर खुशी मनाते।
तुम्हें बुलाने टेर लगाते।।
'जब तक बढ़ता वंश हमारा।
टर्राने का हक है सारा।।
'हम कोई इंसान नहीं हैं।
जिनके कोई नियम नहीं हैं।।
'बारहमासी प्रजनन करते।
नहीं प्रकृति से मानव डरते।।
'हमें न उनसे कोई बाधा।
वर्षा आई हक भी साधा।।
'हम क़ुदरत के नियम पालते।
नहीं किसी के हृदय सालते।।
'दादुर का सिद्धान्त 'शुभम' है।
मानव से हम कभी न कम हैं।
'टर्र - टर्र की योनि हमारी।
मेरी ख़ुशी इसी में प्यारी।।'
💐 शुभमस्तु!
✍रचयिता ©
🐸 डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम'
www.hinddhanush.blogspot.in
24.07.2019 ◆2.30 PM
🐸🐟🐸🐟🐸🐟🐸🐟
Comments
Post a Comment