वो कविता हो नही सकती

जो कवि न  मढ़ता हो, वो  कविता हो  नही सकती|
जिसे कोई न  पढ़ता हो, वो कविता हो नही सकती|
काव्य  का दौर  कैसा है, यहाँ सब लिख रहे हैं क्या|
जिसे हृदय न गढ़ता हो, वो कविता हो नही सकती|

          ©साहिल

निगाहें बयाँ तो बहुत कुछ करती है,
बस समझने की इक नज़र चाहिए |
इरादे मोहब्ब़त में  नेक हो सदा  तो,
नज़ाकत  भरी  इक  नज़र  चाहिए|

जन्म पालना  प्रेम सिखाना,
नारी  से  है  सुदृढ़  जमाना|

पुरुषार्थ  की  सुन्दर   जननी,
सकल सुमंगल कथनी करनी|

मन  मन्दिर  में  स्नेह जगाती,
विविध  रूप  में  है  दुलराती|

    साहिल

जननी तू
करनी तू
शक्ति  तू
मृगनयनी तू
स्नेहमयी
ममता सुखकारी
सुन्दर कृति तू है नारी|

     साहिल

बड़ी शिद्दत से किसी को अपना बनाइए|
मुहब्बत  का  प्याला  प्रेम  से  पिलाइए|
नज़रे  भी  मिलेगी, सपने  भी  आएगें |
दिल की  धड़कन को  प्रीत में  लगाइए|

नजरों की  नज़ाकत समझिए  ज़रा|
दिलों   का  धड़कना  परखिए  ज़रा|
ज़ख्म और मरहम की जरूरत नही|
मुहब्ब़त  का  इशारा  समझिए ज़रा|

         ©️  साहिल

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